Notebook Manufacturers Seek Urgent Government Action 2026: GST Relief & Import Restrictions Demanded to Protect Students
Notebook manufacturers seek immediate Ministry of Finance intervention regarding the 12% GST tax burden and duty-free paper imports that are spiking study costs for students.

Executive Summary: नोटबुक निर्माताओं की गुहार और छात्रों पर सीधा असर
भारतीय नोटबुक निर्माताओं (Indian Notebook Manufacturers) ने केंद्र सरकार से सस्ते विदेशी आयात (Cheap Imports) को रोकने और GST Tax Burden को तत्काल कम करने की मांग की है। 10 सितम्बर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में अभ्यास पुस्तिकाओं (Exercise Notebooks) पर 12% GST और कच्चे माल (Paper Pulp & Raw Paper) की ऊंची कीमतों के कारण स्टेशनरी के दाम रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुके हैं। इसका सीधा वित्तीय प्रभाव Tier-2 और Tier-3 शहरों के Sarkari Job अभ्यर्थियों, UPSC, SSC, और State PSC परीक्षाओं की तैयारी करने वाले लाखों छात्रों पर पड़ रहा है।
Notebook Tax & Industry Overview 2026
| पैरामीटर (Parameter) | वर्तमान स्थिति (Current Status 2026) | उद्योग की मांग (Industry Demand) |
|---|---|---|
| Exercise Notebook GST Rate | 12% | 0% या 5% स्लैब |
| Raw Material Import Duty | उच्च इनपुट लागत (High Input Cost) | डंपिंग रोधी शुल्क (Anti-Dumping Duty) |
| प्रभावित वर्ग (Affected Class) | प्रतियोगी छात्र व स्कूल/कॉलेज विद्यार्थी | स्टेशनरी की कीमतों में 25-30% की राहत |
| संबंधित मंत्रालय (Ministry) | वित्त मंत्रालय और वाणिज्य मंत्रालय | त्वरित नीतिगत सुधार (Policy Action) |
| मुख्य मुद्दा (Primary Issue) | ASEAN देशों से बिना शुल्क आयात | Make in India निर्माताओं का संरक्षण |
In-Depth Analysis: क्यों बढ़ रहे हैं नोटबुक के दाम?
1. 12% GST और इनवर्जन टैक्स स्ट्रक्चर का बोझ
भारतीय स्टेशनरी महासंघ के अनुसार, अभ्यास पुस्तिकाओं को आवश्यक शैक्षणिक सामग्री श्रेणी में रखा जाना चाहिए। वर्तमान में 12% GST Rate लागू होने के कारण प्रति रजिस्टर औसत कीमत में 15 से 25 रुपये की बढ़ोतरी हो चुकी है। छात्रों को परीक्षा के नोट्स बनाने के लिए हर महीने 400 से 600 रुपये सिर्फ रजिस्टरों पर खर्च करने पड़ रहे हैं।
2. सस्ते विदेशी आयात (Cheap Foreign Imports) से घरेलू उद्योग संकट में
चीन, इंडोनेशिया और नेपाल से भारी मात्रा में सस्ता कागज भारतीय बाजार में डंप किया जा रहा है। डंपिंग-रोधी शुल्क न होने के कारण स्थानीय MSME Notebook Manufacturers प्रतिस्पर्धा में पिछड़ रहे हैं और उत्पादन बंद करने की नौबत आ गई है।
3. प्रतियोगी परीक्षा अभ्यर्थियों पर असर (Impact on Job Aspirants)
Tier-2 और Tier-3 शहरों जैसे इलाहाबाद, पटना, इंदौर, और जयपुर में Sarkari Result की तैयारी कर रहे छात्र मुख्यतः फिजिकल नोट्स और प्रैक्टिस सेट पर निर्भर हैं। स्टेशनरी महंगी होने से उनका मासिक पढ़ाई बजट 35% तक बढ़ गया है।
सरकार से की गई मुख्य मांगें (Key Demands Made to Government)
- GST Rate Reduction: अभ्यास पुस्तिकाओं और स्टेशनरी वस्तुओं पर GST को 12% से घटाकर 0% या न्यूनतम 5% किया जाए।
- Anti-Dumping Duty Imposition: विदेश से आने वाले सस्ते और घटिया गुणवत्ता वाले पेपर पर सख्त सीमा शुल्क और डंपिंग रोधी टैक्स लगाया जाए।
- Raw Material Subsidies: घरेलू पेपर मिलों को पल्प (Pulp) और ऊर्जा पर सब्सिडी दी जाए ताकि उत्पादन लागत कम हो सके।
- Public Procurement Policy: सरकारी स्कूलों और प्रतियोगी परीक्षा केंद्रों के लिए स्थानीय निर्माताओं से ही नोटबुक खरीदने का नियम लागू हो।
अभ्यर्थियों के लिए सलाह और आगामी अपडेट्स
यदि सरकार बजट या आगामी GST Council Meeting में कर दरों में कटौती करती है, तो सितंबर-अक्टूबर 2026 तक नोटबुक की कीमतों में गिरावट देखने को मिल सकती है। छात्र तब तक थोक बाजार (Wholesale Market) या डिजिटल नोट्स का उपयोग कर अपनी तैयारी जारी रख सकते हैं।
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